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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटीज) द्वारा ऑफर किए जाने वाले एमबीए पर कॅरियर्स360 की पड़ताल आधारित रिपोर्ट के जवाब में आईआईटी, विशेष रूप से आईआईटी दिल्ली से प्रतिक्रिया मिली है। हमारा सवाल था कि क्या एनआईआरएफ रैंकिंग के अनुसार आईआईटी के प्रबंधन अध्ययन विभाग यानी Departments of Management Studies (DoMS) वास्तव में भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) से बेहतर हैं। और जवाब अब भी वही है, बिल्कुल नहीं। IIT DoMS ने मेरिट या छात्रों को मिलने वाले प्रतिफल के आधार पर आईआईएम को नहीं पछाड़ा, बल्कि डेटा प्रस्तुतीकरण, डेटा घालमेल और डेटा फर्जीवाड़े के जरिए ऐसा करने में सफलता पाई।
शैक्षणिक वर्ष | स्वीकृत सीटें | वास्तविक नामांकन | उत्तीर्ण | प्लेसमेंट | प्लेसमेंट/स्वीकृत सीटें % |
2016-17 | 115 | 91 | 91 | 91 | 79% |
2017-18 | 115 | 111 | 111 | 111 | 97% |
2018-19 | 115 | 68 | 68 | 68 | 59% |
2019-20 | 144 | 129 | 124 | 124 | 86% |
2020-21 | 144 | 117 | 112 | 112 | 78% |
2021-22 | 144 | 128 | 124 | 124 | 86% |
2022-23 | 144 | 93 | 89 | 89 | 62% |
कुल | 921 | 737 | 719 | 719 | 78% |
आईआईटी अपनी एमबीए सीटें नहीं भर पा रहे हैं, जबकि देश में 5 लाख छात्र एमबीए के लिए रजिस्ट्रेशन करते हैं और 2500+ छात्र कैट में 99 पर्सेंटाइल स्कोर करते हैं। फिर भी, आईआईटी दिल्ली अपनी सीटों का केवल 80% ही भर पाया। पिछले 7 वर्षों के डेटा की जांच से पता चलता है कि इन 7 शैक्षणिक वर्षों में स्वीकृत सीटें 921 थीं, लेकिन वास्तविक प्रवेश केवल 737 छात्रों का हुआ, जो स्वीकृत सीटों का 80.02% है। आप आईआईएम में ऐसी विसंगति कभी नहीं देखेंगे, जहां आखिरी सीट भी भर जाती है। वास्तव में, आपको आईआईटी के बीटेक पाठ्यक्रमों में भी ऐसा डेटा नहीं दिखेगा।
वास्तविक एडमिशन स्वीकृत सीटों के 80% तक ही सीमित रह जाने के कारण, संस्थान को केवल इतने ही छात्रों को प्लेसमेंट देने की जिम्मेदारी थी। इसलिए, आईआईटी दिल्ली के डीएमएस द्वारा प्रवेशित 737 छात्रों में से केवल 719 छात्र उत्तीर्ण हुए और सभी 719 छात्रों को प्लेसमेंट भी मिला, इस प्रकार 100% प्लेसमेंट का दावा किया गया।
हमें परेशान करने वाला सवाल यह है कि आईआईटी दिल्ली का प्रबंधन अध्ययन विभाग, जो भारत का चौथा सबसे अच्छा बी-स्कूल होने का दावा करता है, अपनी पूरी क्षमता के अनुसार एडमिशन क्यों नहीं दे पाया? वर्ष 2022-23 के लिए, उन्होंने 144 की स्वीकृत सीटों में से केवल 93 पर छात्रों (64.58%) को एडमिशन दिया। वास्तव में, वर्ष 2018-19 में भी, संस्थान ने 115 स्वीकृत सीटों में से केवल 68 छात्रों (59.13%) को एडमिशन दिया।
इन आंकड़ों में ही असली सच्चाई छिपी है। वर्ष 2022-23 और 2023-24 के लिए, आईआईटी दिल्ली की स्वीकृत क्षमता क्रमशः 144 और 158 थी, जो कुल 302 थी। लिंग अनुपात के कॉलम में, संस्थान ने 165 पुरुष और 137 महिला छात्रों की जानकारी दी, जिसके अनुसार कुल 302 छात्र होते हैं। इसका मतलब है कि संस्थान ने वास्तव में अपनी 100% सीटें भर ली थीं, क्योंकि उन्हें सभी 302 छात्रों का लिंग भी पता था। इसमें वर्ष 2022-23 की 144 सीटें भी शामिल थीं।
हालांकि, जब प्लेसमेंट की घोषणा की बारी आई, तो आईआईटी दिल्ली ने घोषित किया कि केवल 93 विद्यार्थियों को एडमिशन दिया गया था और 89 विद्यार्थियों को प्लेसमेंट मिला। लेकिन उन्होंने पहले ही 144 स्टूडेंट्स के लिंग अनुपात की घोषणा कर दी थी! और अगर हम एडमिशन पाए विद्यार्थियों के लैंगिक विभाजन डेटा पर गौर करें, तो कुल एडमिशन लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या 144 थी, जिनमें से 89 विद्यार्थियों को प्लेसमेंट मिला। यह केवल 62% प्लेसमेंट है।
यह डेटा देखने से स्पष्ट है:
यदि आईआईटी दिल्ली का प्रबंधन अध्ययन विभाग, जो देश का चौथा सबसे अच्छा बी-स्कूल है, अपनी 20% सीटें नहीं भर पाया, तो यह वास्तव में चिंता की बात है।
यदि आईआईटी दिल्ली का प्रबंधन अध्ययन विभाग अपने वास्तविक एडमिशन लेने वाले विद्यार्थियों को प्लेसमेंट नहीं दिला पा रहा है (जैसा कि ऊपर बिंदु 5 से सिद्ध होता है), तो हमें चिंता करनी चाहिए।
यदि आईआईटी दिल्ली का प्रबंधन अध्ययन विभाग 100% प्लेसमेंट दिखाने के लिए प्लेसमेंट डेटा में घालमेल कर रहा है, तो इसकी जांच होनी चाहिए।
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Greetings,
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Category |
QA |
VARC |
DILR |
Overall |
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General |
60 |
60 |
60 |
95 |
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OBC |
50 |
50 |
50 |
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